राकेश कुमार सिंह के उपन्यासों में अभिव्यक्त आदिवासी जीवन

Description

भारतीय समाज की बहुलतावादी संरचना में आदिवासी समुदाय का महत्वपूर्ण स्थान है। आदिवासी समाज अपनी विशिष्ट संस्कृति, परंपराओं, जीवन-दृष्टि, सामुदायिक व्यवस्था तथा प्रकृति के साथ गहरे संबंध के लिए जाना जाता है। भारत की सांस्कृतिक विविधता को समृद्ध बनाने में आदिवासी समुदाय का विशेष योगदान रहा है। किंतु आधुनिक विकास की अवधारणा, औद्योगीकरण, नगरीकरण, खनन परियोजनाओं, बाँध निर्माण तथा वैश्वीकरण की प्रक्रियाओं ने आदिवासी जीवन को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। इसके परिणामस्वरूप आदिवासी समाज विस्थापन, आर्थिक शोषण, सांस्कृतिक विघटन, सामाजिक उपेक्षा तथा अस्तित्व के संकट जैसी अनेक समस्याओं का सामना कर रहा है।

समकालीन हिंदी साहित्य में आदिवासी जीवन और उसके बहुआयामी यथार्थ को अभिव्यक्त करने वाले साहित्यकारों में राकेश कुमार सिंह का महत्वपूर्ण स्थान है। उनके उपन्यासों में आदिवासी समाज के जीवन-संघर्ष, सामाजिक संरचना, आर्थिक विषमता, सांस्कृतिक अस्मिता, परंपरागत जीवन-मूल्यों तथा बदलते सामाजिक परिवेश का सजीव और यथार्थपरक चित्रण मिलता है। लेखक ने आदिवासी समुदाय को केवल करुणा या सहानुभूति का विषय नहीं बनाया है, बल्कि उसे आत्मसम्मान, संघर्षशीलता, सामुदायिक चेतना तथा अपने अधिकारों के प्रति सजग समाज के रूप में प्रस्तुत किया है। उनके उपन्यासों में जल, जंगल और जमीन से जुड़े प्रश्न, विकास और विस्थापन की त्रासदी, प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार, सामाजिक अन्याय, प्रशासनिक उपेक्षा तथा सांस्कृतिक संरक्षण के मुद्दे प्रमुखता से उभरकर सामने आते हैं।

 

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DOI: 10.5281/zenodo.20772539

Publication Date: 2026-06-20

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