आचार्य रमाकांत पांडेय कृत अलिविलासि संलाप महाकाव्य में भारतीय ज्ञान परंपरा

Description

भारतीय ज्ञान परंपरा भारत की प्राचीन समृद्ध और निरंतर चलने वाली एक बौद्धिक प्रणाली है | जो वेद पुराण उपनिषद आदि अनेक क्षेत्रों में विस्तृत है, यह केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक सामाजिक और नैतिक मूल्यों का एकीकृत ज्ञान कोष है | सहस्त्र पदयात्मक नव शतकों में विभाजित अलिविलासि संलाप  महाकाव्य का भारतीय पारंपरिक शास्त्र काव्य में विशिष्ट स्थान है | इसके प्रणेता महामहोपाध्याय गंगाधर शास्त्री काशी के पंडित्य परंपरा में शीर्षस्थ विद्वान में परिगणित होते हैं | यह कृति स्वतंत्र संस्कृत साहित्य की अमूल्य धरोहर  अलिविलासि संलाप   महाकाव्य को आचार्य रमाकांत पांडे महोदय द्वारा राष्ट्रभाषा  में अनुवाद कर समलंकृत किया  आचार्य जी का अभिनव रचना परंपरा में विशेष्य योगदान है | इस आलोच्य ग्रंथ के मंगलाचरण में ही कवि ने भारतीय ज्ञान परंपरा का वर्णन किया है

विद्या विद्यत एव यत्र सततं वेद्यो न यो रागिणां

यं वैद्यं मनसा प्रपद्य विषयव्यालेष्वभीका बुधा:।

वेदाशेषविचारसीमविलसत्सिद्धांतभूमि:स मे

विद्युत्य द्यतु ह्रद्यवद्यमखिलं श्री वैद्यनाथ:शिव:।।१/

Authors

DOI: 10.5281/zenodo.20759743

Publication Date: 2026-01-31

Back to publications list


About