ग्रामीण सत्ता संरचना (Rural Power Structure) ग्रामीण समाज की एक पारंपरिक ढांचा है जिसमें गांव के कुछ लोग निर्णय लेने, संसाधनों पर नियंत्रण और ग्रामवासियों के व्यवहार व जीवन को निर्देशित करने का अधिकार रखते हैं। ब्रिटिश काल में स्थायी और महालवाड़ी बंदोबस्त ने जमींदारों को यह अधिकार प्रदान कर दिया। एम.एन. श्रीनिवास के अनुसार गांव की सत्ता मुख्य रूप से प्रभु जाति (Dominant Caste) के हाथ में होती है। आजादी के उपरांत इस तरह के सत्ता संरचना को खत्म करने के लिए जमींदारी उन्मूलन कानून बनाए गए। ग्रामीण सत्ता संरचना पर नियंत्रण रखने वाले जमींदारों एवं मध्यस्थों का देश की राजनीति में भी पकड़ थी जिसका भरपूर उपयोग करके उन्होंने जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार को असफल बनाया। प्रस्तुत शोध पत्र में भूमि सुधार कानूनों का ग्रामीण सत्ता संरचना पर प्रभाव को समझने का प्रयास किया गया है।
Publication Date: 2026-05-25