२१ वीं सदी के हिन्दी कथा साहित्य में दलित विमर्श

Description

        भारतीय समाज में वर्ण और कर्म को अनन्य साधारण महत्त्व दिया गया है और इसके केंद्र में धर्म को रखा गया है I धर्म व्यवस्था की मूल जड़ जातिव्यवस्था रही है I इस जातिगत व्यवस्था ने मनुष्य-मनुष्य में भेदाभेद का निर्माण किया I इस भेदाभेद से मानव समूह के एक वर्ग को हमेशा तिरस्कृत नज़रों से देखा गया और उन पर बहुत सारे अन्याय किए गये I जो मनुष्य के लिए अशोभनीय है I इस तिरस्कृत वर्ग को दलितनाम से जाना गया है I

        दलितोंका सम्पूर्ण जीवन अनुसंधान का विषय रहा है I आज यह वर्ग मात्र अनुसंधान या चर्चासत्र का विषय ही नहीं रहा अपितु सामाजिक संगठन तथा डॉ. बाबासाहब आम्बेडकर द्वारा लिखित संविधानके सहयोग से अपने हक़ तथा अधिकारों के लिए लड़कर, मनुष्य होने के नाते समाज में एक प्रतिष्ठित पद या मनुष्य के रूप में विराजमान हो रहा है I

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DOI: 10.5281/zenodo.18654452

Publication Date: 2026-02-16

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