भारतीय समाज में वर्ण और कर्म को अनन्य साधारण महत्त्व दिया गया है और इसके केंद्र में ‘धर्म’ को रखा गया है I धर्म व्यवस्था की मूल जड़ जातिव्यवस्था रही है I इस जातिगत व्यवस्था ने मनुष्य-मनुष्य में भेदाभेद का निर्माण किया I इस भेदाभेद से मानव समूह के एक वर्ग को हमेशा तिरस्कृत नज़रों से देखा गया और उन पर बहुत सारे अन्याय किए गये I जो मनुष्य के लिए अशोभनीय है I इस तिरस्कृत वर्ग को ‘दलित’ नाम से जाना गया है I
‘दलितों’ का सम्पूर्ण जीवन अनुसंधान का विषय रहा है I आज यह वर्ग मात्र अनुसंधान या चर्चासत्र का विषय ही नहीं रहा अपितु सामाजिक संगठन तथा डॉ. बाबासाहब आम्बेडकर द्वारा लिखित ‘संविधान’ के सहयोग से अपने हक़ तथा अधिकारों के लिए लड़कर, मनुष्य होने के नाते समाज में एक प्रतिष्ठित पद या मनुष्य के रूप में विराजमान हो रहा है I
Publication Date: 2026-02-16